Nirikshan by DM and SSP

Nirikshan by DM and SSP

Barawafat mauqe comes by nikalne wale juloos-E-moammadi comes root of ssp nirikshan karte hey DM Read more

Lion of India

Lion of India

You can completely customize the featured slides from the theme theme options page. You can also easily hide the slider from certain part of your site like: categories, tags, archives etc. Read more

Lion of Bangal

Lion of Bangal

You can completely customize the featured slides from the theme theme options page. You can also easily hide the slider from certain part of your site like: categories, tags, archives etc. Read more

Rajmahal

Rajmahal

You can completely customize the featured slides from the theme theme options page. You can also easily hide the slider from certain part of your site like: categories, tags, archives etc. Read more

 

रेलवे स्टेशन पर 1 घंटे में बिछ गई थीं 21 लाशें, शहर छोड़कर भाग रहे थे लोग

50_1448742160
भोपाल. भोपाल गैस त्रासदी के 31 साल पूरे होने पर हम आपको बता रहे हैं कि उस समय शहर के हालात कैसे हो गए थे। यूनियन काबाईड से जहरीली गैस रिसने का सबसे ज्यादा असर रेलवे पर हुआ। यहां 10 हजार कर्मचारियों की आबादी में 130 मौतें रिकार्ड हुईं। 1 घंटे के अंदर 21 व्यक्तियों की मौत हुई और 300 व्यक्ति बेहोश हुए। दुर्घटना के अगले दिन रेलवे स्टेशन की हालत के फोटो दुर्लभ हैं जो एक किताब से लिए गए हैं।
इस तरह जहरीली गैस ने ढाया स्टेशन पर कहर…
रविवार की ठंडी रात । 2 दिसंबर 1984। समय दिन के 11 बजे। स्टेशन से 1 किमी दूर था यूनियन काबाईड जो इस स्टेशन और आसपास की बस्ती को ठीक 14 घंटे बाद मौत के आगोश में सुलाने को तैयार था। गैस को रोकने के प्रयास कर्मचारी और अधिकारी करते रहे लेकिन वह इसका बिना निदान निकाले 5 बजे अपनी कारों और स्कूटर पर बैठकर निकल गए।
रात के 12 बजकर 5 मिनट के बाद। रेलवे स्टेशन पर लखनऊ से आने वाली गाड़ी की प्रतीक्षा चल रही थी। ठंड से सिकुड़ते यात्री वहां आग तापकर शरीर की कंपकपी दूर करने का प्रयास कर रहे थे, तभी अचानक लोगों का गला रूंधने लगा। कंठ में एक गोला सा बनने लगा, जिससे सांस लेने में तकलीफ होने लगी। आंखों में जलन, आंसू, उल्टियां, झाग तथा दम घुटने की स्थिति बनने लगी। स्टेशन पर सवारी की बाट जोहने वाले तांगा चालक और घोड़े भी मरे। टिकिट कांउटर पर टिकट बेचने वाले बाबू भी मरे। रेल संचालन रोकने के लिए रेलकर्मियों ने अपनी जान की बाजी लगाई।
रेलवे के मंडल चिकित्सा अधिकारी डॉ एके सरकार, उपस्टेशन अधीक्षक गुलाम दस्तगीर, एएसएम मदन गोपाल पाराशर, मुख्य नियंत्रक बीके शर्मा, सेक्शन कंट्रोलर बीबी शर्मा, लिपिक लालचंद पराछे और चपरासी रामावतार प्रजापति बराबर ड्यूटी करते रहे।
उस रात डेढ़ पौने 2 बजे जैसे ही लखनऊ से आने वाली गोरखपुर एक्सप्रेस स्टेशन पर रूकी तो यात्रियों को घुटन का अनुभव होने लगा। उनकी आंखों में जलन होने लगी। तुरंत खिड़कियों को बंद किया गया लेकिन तब तक वह एक नजर में देख चुके थे कि स्टेशन और बाहर से डरावनी आवाजें आ रही हैं। बच्चों के रोने, चिल्लाने और यंत्रणा से छटपटाती आवाजें सुनाई दे रही थी। मिनट-मिनट भारी होने लगा और यात्रियों पर भी गैस का प्रभाव होने लगा। तभी गाड़ी चलने लगी जिससे उन्हें राहत मिली। यदि 5 मिनिट और गाड़ी रुक जाती तो ट्रेन में ही लाशों के ढेर लग जाते।
उसी रात 2.20 बजे भोपाल से 10 किमी पहले सूखी सेवनियां पर चार-पांच डिब्बों की एक विशेष गाड़ी रूकी थी जिसमें केवल रेलवे का स्टॉफ था। उस गाड़ी में मध्य रेलवे के महाप्रबंधक गौरीशंकर थे, जो झांसी डिवीजन का निरीक्षण कर भोपाल की तरफ आ रहे थे। इन्हें रात में 3 बजे जगाया गया कि भोपाल की तरफ से सिग्नल नहीं मिल रहे। यह समझकर कि भोपाल में कुछ गड़बड़ है, उन्होंने बोगी को अलग कर इंजिन से भोपाल की तरफ चल दिए। वह बहुत धीमे-धीमे चले और 10 किमी की दूरी सवा घंटे में तय की। जैसे ही वह निशातपुरा पहुंचे तो हजारों लोगों को उन्होंने भागते हुए देखा। निशातपुरा रेलवे स्टेशन पर एक गार्ड भागता हुआ, जिसे उन्होंने अपने साथ ले लिया। उसकी आंखे लाल हो रही थी और वह खांस रहा था।
जब वह रेलवे स्टेशन पर पहुंचे तो स्टेशन सूना पड़ा था। वेटिंग रूम में 5 लाशें पड़ी थी। कुछ आदमी कमरों के दरवाजे और खिड़कियां बंद कर अंदर डरे हुए बैठे थे, उनमें कुछ बेहोश थे। कमरों को खुलवाकर उन्हें बाहर निकाला गया। तब तक 5 बज चुके थे, गैस का प्रभाव कम हो गया था।
वहीं उन्हें पता चला कि स्टेशन मास्टर गैस का शिकार हो गए। कर्मचारी गायब हो गए थे लेकिन ट्रेन तो चालू करवाना था। निशातपुरा से आए गार्ड रामलाल से उन्होंने लाइन क्लियर कराई, अपने गार्ड से एनाउंसमेंट कराया और सुबह साढ़े 7 बजे पहली गाड़ी चली जो दिल्ली से आने वाली जीटी एक्सप्रेस थी। 10 बजे तक बीना, इटारसी, झांसी से रेल कर्मचारी बुलाकर काम पर लगाए गए। स्टेशन की सफाई कराई गई। उस समय वहां 200 गैस पीड़ित थे। फर्स्ट क्लास के वेटिंग रूम में अस्पताल शुरू किया गया। जगह कम देखकर दूसरे वेटिंग रूम को भी अस्प्ताल बना दिया गया। दूसरे रेलवे स्टेशन से नर्स और डाक्टर आए।
रेल विभाग की एक सूचना के अनुसार, 10 हजार कर्मचारियों की आबादी में 130 मौतें रिकार्ड हुई।1 घंटे के अंदर 21 व्यक्तियों की मौत हुई और 300 व्यक्ति बेहोश हुए। डॉ एके तिवारी जब स्टेशन पर पहुंचे तो 600 आदमियों को वहां पड़े देखा अपनी उल्टियां, पेशाब में ही पड़े थे। कुछ लोगों को तीव्र बैचेनी हो रही थी कुछ को लकवा मार चुका था। रेलवे की रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा है कि यूनियन कार्बाइड की विषैली गैस का प्रभाव अत्यंत तीव्र तथा घातक था।
रेलवे के महाप्रबंधक ने रेलवे स्टेशन के रेलवे कॉलोनी के 500 घरों का दौरा किया तो उन्हें 90 फीसदी घर बंद मिले। रेल कर्मचारियों में 83 व्यक्तियों की मौत हुई। उन्हें 200 व्यक्तियों पीड़ित मिले जिन्हें इलाज का प्रबंध किया गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Web Design BangladeshBangladesh Online Market